KAVITA BAHAR
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जीवन में अनमोल है जल

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जीवन में अनमोल है जल

जल से उत्पत्ति जीवन की,

निर्मित जल से, ब्रम्हाण्ड सकल

जीवन में अनमोल है जल |

निर्मल, निश्छल बहती धारा,

मीठा कहीं, कहीं जल खारा,

जिस पर आश्रित संसार

विविध स्रोत मिलती जलधार

झर-झर झरता है झरने से, ऊँचे पर्वत रहता जल |

जीवन में अनमोल है जल |

नदियों में जल बहता रहता,

झीलों से कुछ कहता रहता,

कूप, बावली, तालाबों में,

सारे मौसम सहता रहता,

दूर तलक फैले सागर में, चलती रहती उथल-पुथल |

जीवन में अनमोल है जल |

पर्वत पर जाकर जम जाता,

कहीं ग्लेशियर बन भरमाता,

वाष्प बने, उड़ जाये ऊपर,

बारिश बन धरती पर आता,

प्यासी-प्यासी वसुधा को, जल, पल भर में करे सजल |

जीवन में अनमोल है जल |
उमा विश्वकर्मा, कानपुर, उत्तरप्रदेश