कविता 22 कागज की कश्ती- मनीभाई नवरत्न

कविता 22
कागज की कश्ती
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कागज की कश्ती, सदा नहीं ठहरती।
कभी ना कभी तो यह डूब के रहती।
कागज की कश्ती….
यह सागर कितना गहरा है.
उस पर तूफानों का पहरा है .
इनके लहरों में कितनी हलचल है.
डूबने का खतरा पल पल है .
यह जीवन भी है वही कश्ती .
समझ ले अपनी हस्ती ।।
कहने को तो ये जहां हरा भरा है।
पर यह तो दुखों से भरा है ।
चारों तरफ कोहराम मचा है
दुनिया वाले ने क्या अजब रचा है ?
है यह दुनिया भी है वही कश्ती
समझ ले अपनी हस्ती ।।
रिश्ते तो प्यार का बंधन है ।
पर निभाता कोई नहीं उलझन है।
यहां तो अपने भी गैर हैं
प्यार का दिखावा अंतर्भाव बैर है ।
यह रिश्ते भी हैं वही कश्ती ।
समझ ले अपनी हस्ती ।।
मनीभाई”नवरत्न”

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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़

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