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कैसी ये महामारी – संस्कार अग्रवाल

कोरोना महामारी पर आधारित रचना – कैसी ये महामारी

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कैसी ये महामारी

कहाँ से आया कैसे आया, पता नहीं क्यों आया है।
करना चाहता क्या है ये, धरती पे क्यों आया है।।
क्या चाहता है क्यों चाहता है, किस मनसूबे से आया है।
मचा रहा भयंकर तबाही क्यों, किस ने इसे बनाया है।।



क्या खोया क्या पाया हमने, सच्चाई बताने आया है।
कर रहा विनाश सब का, मानो प्रकृति को गुस्सा आया है।।
रुक नहीं रहा जा नहीं रहा,क्या सब की जान लेने आया है।
किया दोहन प्रकृति का हमने, उसका प्रतिशोध लेने आया है।।



साथ नहीं कोई दूर नहीं कोई, सब को अलग करने ये आया है।
बता रहा सच्चाई सब की, हकीकत बताने तो नहीं आया है।।
हो रहा दिखावा सब जगह अब, कही पर्दा उठाने तो नहीं आया है।
कर रहा अवगत आगे के लिए, सब की जान लेने तो नहीं आया है।।


किया कैद जानवरो को कभी हमने, हमें कैद करने तो नहीं आया है।
हमने समझा कमजोर प्रकृति को, उसकी ताकत दिखाने तो नहीं आया है।।
सह नहीं सकते रह नहीं सकते, हमें मजबूर करने तो नहीं आया है।
ले रहा जान सबकी ये, कही सब की जान लेने तो नहीं आया है।।



की कटाई पेड़ो की हमने, उसकी कीमत हमें समझाने तो नहीं आया हैं।
कर रहें मनमानी अपनी, हम पर अंकुश लगाने तो नहीं आया है।।
आ गयी महामारी कैसी ये, कही हमने ही तो इसे नहीं बनाया है।
किया प्रकृति का दोहन हमने,कही सबकी जान लेने तो नहीं आया है।।

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