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काल चक्र- बाबूलाल शर्मा

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~~~~~~~~~~~~~~~बाबूलालशर्मा

२१×१५+दीर्घ=३१वर्ण=कलाधर छंद,में चार चरण समतुकांत होते है
      ? *कलाधर छंद* ?
.        ? *काल चक्र*?
.                 ? ?
काम धर्म अर्थ मोक्ष चार मान कामना,
समूल पाप का विनाश हो यही सुभावना।

साधु संत पीर मान धर्म रीत प्रीत की,
प्रतीत पाल शूर वीर धैर्य नीति पालना।

काल चक्र मीत वक्र सत्य बात मान तू,
सरोज के समान कीच बीच,आत्म साधना।

हानि लाभ मृत्यु जन्म ईश हाथ मान ले,
स्वार्थ भाव त्याग मीत साँच,बात मानना।
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भोग भार रोग पीर शोक ग्रस्त होय आज,
हाल देख लोग काल गाल में समा रहे।

दीन हीन भीरु पीर पाय पाप पुण्य दोष,
सोचते अमीर लोग माल व्यर्थ खा रहे।

पीत वेष धार संत बात ऊँच नीच की,
कमान ईश थाम देख खूब मौज पा रहे।

नीर जीव मीन है समीर जीव अन्य भी,
सजीव जीव भक्ष लोग,मच्छ मीन खा रहे।
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कौन द्यूत हारता,कुचाल कौन जीतता,
अनीति भीष्म देखते व द्रोपदी कलापती।

पार्थ वीर थे अधीर धार तीर ताकते,
वही खड़ी निरीह पीर गोपियाँ विलापती।

ईश कृष्ण भूप कान्ह चक्र हाथ धारते,
अकाल काल तीर लागि पाँव पीर व्यापती।

राम सीय साथ भ्रात घोर भू पठार थे,
विशाल दैत्य हारते निशापिशाचि काँपती।
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गंग की तरंग शीश चंद्र की छटा बने,
जटा विशाल नाग संग नंग भूत के रमें।

सिंह पे सवार साथ नादिया गणेश भी,
महेश संग शैल ही विराजि मात हे रमें।

रोग नाश योग देय,भोग शोक नाशनी,
निवार पाप शाप को,अजान हूँ करें क्षमें।

ज्ञान दे सुकाल के विकासमान काम दे,
सँवार भाग्य योग क्षेम,शील भाव दें हमें।
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✍✍?©
बाबू लाल शर्मा “बौहरा”
सिकंदरा, दौसा,राजस्थान
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