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कालरात्रि

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कालरात्रि(कुंडलियाँ)

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मात भवानी सिद्धिदा , दूर करे त्रय ताप।
कालरात्रि माँ पुण्यदा , हरे सभी के पाप।।
हरे सभी के पाप , माँ भव सागर तारिणी।
हे शूलपाणि मात , चण्डमुण्ड संहारिणी।।
कहता कवि करजोरि ,भद्रकाली वरदानी।
कर दो भय से मुक्त, हे कृष्णा माँ भवानी।।
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मात हेशक्तिशालिनी, हम पर कर उपकार।
रक्तबीज संहारिणी , कर आपद संहार।।
कर आपद संहार , अम्ब हे विघ्ननाशिनी।
खड़ग धारती हाथ , मात हे पुण्यदायिनी।।
कहत नवल करजोरि,माँ स्वस्थ रहे हरगात।
हरो सभी संताप , हे खड़ग धारिणी मात।।

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© डॉ एन के सेठी

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