KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

काश तुझे भी मेरे साथ रहना आ जाए

प्रेम आधारित रचना

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काश तुझे भी मेरे साथ रहना आ जाए

लिख दी मैंने अपनी भावनाएं पन्नों में उतार के

काश तुझे शब्द की जगह भावनाएं पढ़ना आ जाए

छुपा ली है मैंने सारी मोतियां अपनी आंखों में

काश तुझे ये आंसू चुराना आ जाए

दिल में दबा के रखे हैं मैंने कुछ दर्द ए आलम

काश तुझे इन्हे समझना आ जाए

गुजर रही हूं मैं हालात ए मुश्किलों से

काश तुझे संभल के चलना आ जाए

चुप हूं कहीं मै आज समाज के डर से

काश तुझे अपने लिए कहना आ जाए

थक गई हूं मै ये जिंदगी का सफर तय करते

काश तुझे भी थोड़ा मेरे लिए रुकना आ जाए

खूबसूरत लगेगी ये जिंदगी भी मुझको

काश तुझे भी मेरे साथ रहना आ जाए

रीता प्रधान, रायगढ़