कात्यायनी माँ पर कविता

कात्यायनी माँ पर कविता

माता दानव घातिनी , हरो सभी के पाप।
होय दूर माँ जगत के , रोग शोक संताप।।
रोग शोक सन्ताप , माता हे कात्यायनी।
कालहारिणी अम्ब , आदि शक्ति वरदायनी।।
कहताकवि करजोरि,मात के गुण जो गाता।
करती संकट दूर , हे भवतारिणी माता।।
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अम्बे हे कात्यायनी , करती है भव पार।
मात भवानी चण्डिका , देवी सिंह सवार।।
देवी सिंह सवार , आज्ञाचक्र माँ साजे।
करे असुर संहार , अम्ब घट घट में राजे।।
कहत नवल करजोरि ,सुनो माँ हे जगदम्बे।
दो हमको आरोग्य , जग हो स्वस्थ माँअम्बे।।

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©डॉ एन के सेठी

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1 thought on “कात्यायनी माँ पर कविता”

  1. डिजेन्द्र कुर्रे कोहिनूर

    बहुत सुंदर

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