कविता’ साहित्य की वह विधा है जिसमें किसी मनोभाव को कलात्मक रूप से किसी भाषा के द्वारा अभिव्यक्त किया जाता है। काव्य वह वाक्य रचना है जिससे चित्त किसी रस या मनोवेग से पूर्ण हो। अर्थात् वह जिसमें चुने हुए शब्दों के द्वारा कल्पना और मनोवेगों का प्रभाव डाला जाता है.

Kavita ‘is the genre of literature in which a sentiment is artistically expressed by a language. Poetry is the syntax that makes the mind complete with emotions. That is, in which imagination and emotions are effected by the chosen words.

दोस्ती का रिश्ता

जन्म से सारे रिश्ते लिखित आवे मात-पिता अनुज सब उपहार में पावे | दोस्ती हि ऐसा रिश्ता माना जावे जसका चुनाव हम स्वयं है करत आवे || यही है दोस्ती॥…

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माता के महिमा

" माता के महिमा "............................... जय ,जय हो मइया दुर्गा, तोरेच गुण ल सब गावै।जय ,जय हो मइया अम्बे, सब तोरेच महिमा बखावै।।तोर शरण म आए बर मइया,जन-जन ह सोहिरावै।।जय,जय…

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नवधा भक्ति नौ दिन ले

नवधा भक्ति नौ दिन ले   नव दिन बर नवरात्रि आये, सजे माँ के दरबार हे ! जगजननी जगदम्बा दाई के, महिमा अपरंपार हे !! एक नहीं पूरा नौ दिन…

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जीवन की कल्पना

चाह नहीं मै बनूं डॉक्टर , मरीजों से पैसा पाऊं।चाह नहीं मैं बन आई ए एस, स्कीमों में लिपटा जाऊं।चाह नहीं मै बनूं मास्टर, ऑनलाइन क्लास लेता जाऊं।चाह नहीं मैं…

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गांधी जी को प्रणाम

गांधी जी को प्रणाम वर्ष 1600 में ईस्ट इन्डिया कम्पनी जब भारत आया। साथ अपने, विदेशी ताकत भी लाया।। फूट डालो शासन करो नीति अपनाया। राजा महाराजाओं को,आपस में खूब…

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खुद से परिभाषित ना कर तू

खुद  से  परिभाषित ना  कर तू  खुद   को   यूँ   खुद   से  परिभाषित   ना  कर  तू मंज़िल  दूर  नहीं   खुद  को  वंचित   ना   कर  तू रोड़े, ईंट, पत्थर, अड़चनें  बहुत  पड़े…

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साहित्य की आत्मा कविता

साहित्य की आत्मा कविता प्रतियोगिता दिवस के लिए हैं। जो 4 से 19 अक्टूबर तक प्रकाशित करने के लिए है साहित्य की आत्मा, कविता होती है निरस कविता साहित्य में स्थान नहीं पा सकता।

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नारियों का सम्मान

इस कविता में महिलाओं के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया है। सन्देश दिया गया है कि नारियों का सदैव सम्मान करें, हमेशा पूजनीय होती है। रचनाकार-महदीप जंघेल

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काका कलाम एक पाती तेरे नाम
kavita

काका कलाम एक पाती तेरे नाम

काका कलाम एक पाती तेरे नाम -------------------------------------------- काका कलाम,काका कलाम बार बार करे हम तुझे सलाम हमे जरा तो बतलाओ पहुंचे कैसे इस मुकाम क्या क्या पढे,क्या गढे दुनिया करें…

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शहर शहर निर्भया

यह रचना हाथरस में हुई घटना पर तथा लचीली व्यवस्था पर सवाल खड़ा किया है!

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