चोका जापानी कविता की एक शैली है। ये लम्बी कविताएँ हैं। जापान के सबसे पहले कविता-संकलन मान्योशू में २६२ चोका कविताएँ संकलित हैं, जिनमें सबसे छोटी कविता ९ पंक्तियों की है। चोका कविताओं में ५ और ७ वर्णों की आवृत्ति मिलती है। अन्तिम पंक्तियों में प्रायः ५, ७, ५, ७, ७ वर्ण होते हैं।
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Choka is a genre of Japanese poetry. These are long poems. Manyoshu, the first poetry collection of Japan, has 242 choka poems, the shortest poem being 6 lines. Frequency of 5 and 4 characters is found in Choka poems. The last lines usually have 5, 4, 5, 6, 6 characters.

चोंका -फूल व भौंरा
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चोंका -फूल व भौंरा

फूल व भौंरा ★★★★★बसंत परफूल पे आया भौरा बुझाने प्यास।मधुर गुंजन सेभौरा रिझाताचूसता लाल दलपीकर रसभौंरे है मतलबीक्षुधा को मिटाबनते अजनबीफूल को भूलछोड़ दी धूल जानउसे अकेला।शोषको की तरहमद से चूर ।तन…

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चोका:- नारी
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चोका:- नारी

चोका :-नारी★★★★★ हर युद्ध काजो कारण बनतालोभ, लालचकाम ,मोह स्त्री हेतुपतनोन्मुखइतिहास गवाहस्त्री के सम्मुखधाराशायी हो जाताबड़ा साम्राज्यशक्ति का अवतारनारी सबला।स्त्री चीर हरण सेकौरव नाशमहाभारत कालरावण अंतसीता हरण करस्त्री अपमानहर युग…

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चोका:- हरित ग्राम
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चोका:- हरित ग्राम

चोका :-हरित ग्राम★★★ ★★ हरित ग्राम...हरी दीवार परपेड़ का चित्र।छाया कहीं भी नहींदूर दूर तक।नयनाभिराम हैमहज भ्रम।आंखों में झोंक लियेधुल के कण।तात्कालिक लाभ नेकिया है अंधास्वार्थपरताखेलती अस्तित्व सेयह जान केबनते…

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चोका – लाचार दूब- मनीभाई नवरत्न

चोका:- लाचार दूब ★★★★ हर सुबह आसमान से गिरे मोती के दाने चमकीले, सजीले दूब के पत्ते समेट ले बूंदों को अपना जान बिखेरती मुस्कान हो जाती हरा पर सूर्य…

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चोका:  कहाँ मेरा पिंजर
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चोका: कहाँ मेरा पिंजर

*चोका 1* कहाँ मेरा पिंजर ? ★★★★★ उड़े विहंग~ नाप रहे ऊंचाई। धरा से नभ जुदा व तनहाई। तलाश जारी सही ठौर ठिकाना। मन है भारी भूल चुके तराना। जिद…

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चोका: संग मेरे रहना
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चोका: संग मेरे रहना

चोका:संग मेरे रहना सीख गये हैं तुझे प्यार करके सब लोगों से अब प्यार करना जान गये हैं बयां हाल ए दिल नहीं मुश्किल ऐतबार करना उलझा था मैं जबसे…

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चोका: काव्य गढ़ता गया
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चोका: काव्य गढ़ता गया

चोका:काव्य गढ़ता गया लिखता गयामन के आवेगों कोअपना दर्दकम करता गया।मैं नाकाम हूँजीवन के पथ मेंशब्दों से चित्रबस खींचता गया।उभरते हैंमेरे हृदय तलप्रेम व पीड़ा जिन्हें सुनाता गया।कभी खुद कीकभी…

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चोका: अब दर्द ही सिला
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चोका: अब दर्द ही सिला

चोका: अब दर्द ही सिला★★★★★★★ ढुंढता रहाबीच शहर छाया,वृक्षों की साया।कहीं भी नहीं मिलाकैसी दुविधा?यहाँ सुख सुविधा शांति न लायामन पुष्प ना खिलाये जीवन मेंजन-गण-मन मेंकहर ढायाहोगी विनाश लीलासब जानता,पर…

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चोका  – बन प्रकाश
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चोका – बन प्रकाश

चोका -बन प्रकाश★★★★★ टिमटिमातादूर से मैं प्रकाशमूक मौन साफिर भी हूँ बताताअभी नहीं हैअंधेरे का साम्राज्यपूरी तरह...ये लौ, मेरा होनाउम्मीद रखमरते दम तकजलना मुझे।कोई फूंक तो मारेचिंगारी बनसर्वनाश करूँगा;अखिल धरा…

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