घनाक्षरी एक वार्णिक छन्द है। इसे कवित्त भी कहा जाता है। हिन्दी साहित्य में घनाक्षरी छन्द के प्रथम दर्शन भक्तिकाल में होते हैं। निश्चित रूप से यह कहना कठिन है कि हिन्दी में घनाक्षरी वृत्तों का प्रचलन कब से हुआ। घनाक्षरी छन्द में मधुर भावों की अभिव्यक्ति उतनी सफलता के साथ नहीं हो सकती, जितनी ओजपूर्ण भावों की हो सकती है।

नव वर्ष आया सखी
नव वर्ष की शुभकामना

नव वर्ष आया सखी

नव वर्ष आया सखी शीतल बयार लिये,        नूतन श्रृंगार किये,               नव वर्ष आया सखी,            …

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युवा वर्ग आगे बढ़ें
घनाक्षरी 

युवा वर्ग आगे बढ़ें

युवा वर्ग आगे बढ़ें छन्द - मनहरण घनाक्षरी    युवा वर्ग आगे बढ़ें,  उन्नति की सीढ़ी चढ़ें,        नूतन समाज  गढ़ें,              …

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हरितालिका तीज – राजेश पान्डेय वत्स
कविता बहार दिवस आधारित रचनाओं का भंडार

हरितालिका तीज – राजेश पान्डेय वत्स

हरितालिका तीज! (घनाक्षरी) भाद्रपद शुक्ल पक्ष, पावन तृतीया तिथि, पूजन निर्जला ब्रत, रखें नारी देश के! माता रूप मोहनी सी, श्रृँगारित सोहनी सी, उम्र यश लंबी माँगे, अपने प्राणेश के!…

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