हिन्दी कविता: काव्य विषय की विराटता-:- मनीभाई’नवरत्न’

काव्य विषय की विराटता
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(एक कवि का स्वयं पर व्यंग्य)
रचयिता:- मनीभाई’नवरत्न’


ये काव्य युग,
सम्मान का युग है।
चलो अच्छी बात है।
हमें खुशी है
एक कवि के होने के नाते,
समाज के कुछ तो काम आते।
पर ध्यान रहे ,
सारा श्रेय मुझे ही लेना बेमानी है।
चूंकि सम्मान की पीछे
और भी कहानी है।
कंगूरा सा कवि लालायित है
चमकने को जमाने में।
नींव सा रचना
अभी भी छटपटा रही है
पहचान पाने में।
बिन नींव के कंगूरे की
एक अधूरी दास्तां है।
कवि का वजूद भी तो
कविता से ही वास्ता है।
और कविता का वास्ता
ईश्वर, प्रकृति से,
सामाजिक रीति से।
दीन-हीन की दशा से
मौसम-रंग-दिशा से।
कवि तो बौना है
उस अर्जुन की भांति
जो यह समझ लेता
कि महाभारत युद्ध
अपने दम पर जीता।
जानके अनजान रहता
काव्य विषय की महत्ता
उसका विराट स्वरूप।
✒️ मनीभाई’नवरत्न’,
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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़