KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

हिंदी संग्रह कविता-खड़ा हिमालय बता रहा है

0 349

खड़ा हिमालय बता रहा है


खड़ा हिमालय बता रहा है, डरो न आँधी पानी में।
खड़े रहो अपने ही पथ पर, कठिनाई – तूफानों में।
डिगो न अपने पथ से तो फिर, सब कुछ पा सकते प्यारे।
तुम भी ऊँचे हो सकते हो, छू सकते नभ के तारे।
अचल रहा जो अपने पथ पर, लाख मुसीबत आने में।
मिली सफलता उसको जग में, जीने में, मर जाने में।
जितनी भी बाधाएँ आई, उन सबसे ही लड़ा हिमालय।
इसीलिए तो दुनिया भर में, हुआ सभी से बड़ा हिमालय।


सोहन लाल द्विवेदी

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.