KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

यदि आपकी किसी एक ही विषय पर 5 या उससे अधिक कवितायेँ हैं तो आप हमें एक साथ उन सारे कविताओं को एक ईमेल करके kavitabahaar@gmail.com या kavitabahar@gmail.com में भेज सकते हैं , इस हेतु आप अपनी विषय सम्बन्धी फोटो या स्वयं का फोटो और साहित्यिक परिचय भी भेज दें . प्रकाशन की सूचना हम आपको ईमेल के माध्यम से कर देंगे.

खेल कराते मेल – खेल दिवस पर कविता

खेल समाज को स्वस्थ बनाने के साथ साथ मित्रता से रहना भी सिखलाते हैं। खेल से बच्चों में सामाजिकता का विकास होता है।

0 1,533

खेल कराते मेल – खेल दिवस पर कविता

खेल कराते मेल - खेल दिवस पर कविता
national sports day

व्यस्तता की गहरी खाई में,
भौतिकता की अंगड़ाई में,
जहाँ अपना कोई न समझे,
हो रहा जहाँ पर ठेलमठेल,
देखो तब खेल कराते मेल।

मानव को मानव से जोड़े,
हाथ मिला विष नाता तोड़े,
दूरी दिल की या हो मीटर,
राह के रोड़े देते हैं ठेल,
देखो हैं खेल कराते मेल।

भावना भरी है भाईचारे की,
जय हो ऐसे खेल प्यारे की,
कटुता द्वेष सब भूल जाते,
जब हो मैदां में रेलमरेम,
देखो ना खेल कराते मेल।

जीवन की इस लघुता में,
भौतिकता की पंगुता में,
प्यार से सबको गले लगाएं
आओ मिलकर खेले खेल,
देखो हैं खेल कराते मेल।

★★☆★★★☆★★★★
अशोक शर्मा,कुशीनगर,उ.प्र.
★★★★★★★★★★★

Leave A Reply

Your email address will not be published.