KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

कहें सच अभी वो जमाना नहीं है

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कहें सच अभी वो जमाना नहीं है

कहें सच अभी वो जमाना नहीं है।
यहाँ सच किसी को पचाना नहीं है॥
मिले जो अगर यूँ किसी को अँगाकर। 
खिला दो उसे तो पकाना नहीं है॥
लगे लूटने सब निठल्ले यहाँ पर।
उन्हें तो कमाना धमाना नहीं है॥
मुसीबत अगर आ गई तो फँसोगे। 
यहाँ बच सको वो बहाना नहीं है॥
पसीना बहाया यहाँ पर कमाने। 
मिले मुफ्त में वो खजाना नहीं है॥
समझना अगर है तभी तो बताओ।
अकारण मुझे सर खपाना नहीं है॥
रहूँ सिर्फ बालक अगर हो सके तो।
बड़ा नाम कोई कमाना नहीं है॥
बालक “निर्मोही”
      बिलासपुर
  26/05/2019
        23:30
कविता बहार से जुड़ने के लिये धन्यवाद

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