KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

किसान की पहचान

किसान का गुणगान कविता के माध्यम से किया गया है।

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किसान की पहचान

अन्न-आहार का किसान करे खुब पैदावार,
किसान की खेती से प्रकृति में आए बहार।
हल-यंत्र से किसान करे खेतों में काम,
किसान की खेत है पवित्र चारों-धाम।
कृषि की उपज से है मुख पर मुस्कान,
कृषि है कर्मभूमि, किसान की पहचान।

प्रकृति के प्रकोप से जब पड़े भीषण-अकाल,
कठिन परिश्रम से जीवन को बनाए खुशहाल।
किसान है निर्भीक रहे सदैव दयावान,
कृषि है कर्मभूमि,किसान की पहचान।

सर्प बिच्छू कीट पतंग किसान के हैं मित्र,
वर्षा – ऋतु में सुंदर धान रोपा का है चित्र।
बदन में है पसीना लब पर है मीठ-गान,
कृषि है कर्मभूमि,किसान की पहचान।

धरा को चीरकर किसान उगाए अन्न,
सभी को भोजन दे किसान हैं धन्य।
अतिवर्षा और तपती धूप की तपन,
किसान है अडिग और मजबूत मन।
कृषक बीना सुनसान है खेत खलिहान,
कृषि है कर्मभूमि,किसान की पहचान।

सच्चा पुत्र है भारत माता का किसान,
देश के विकास में दे अमूल्य योगदान।
लाभ-हानि को सहकर करें कृषि-काम,
करें खेत की रखवाली प्रातः हो या शाम।
मैं लेखनी से करूं किसान का बखान,
कृषि है कर्मभूमि,किसान की पहचान।

अकिल खान रायगढ़

जिला-रायगढ़ (छ.ग.) पिन – 496440.

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