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विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर के०के० रैगर की कविता

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विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर के०के० रैगर की कविता


नशा नाश की जड़ है भैया
कहत जगत में लोग लुगइयां
खोवे सुख तन और रुपैया
थोरी होत है जीवन नैया।

सुन लो चाचा,ताऊ,मैया।
और दीदी,दाऊ, भैया
खावे गुटका,पान, सुपारी
इन से होत है कई बीमारी।
राखै बीड़ी चिल्लम व हुक्को
इनको मारो अब थे धक्कों।
सिगरेट फूंके बूढ़ो काको
फिर लेवे जर्दा रो फांको

कहणो मानो सा थे म्हाको
नहीं तो नशो नाश हे थांको
सब भाया सू कहणो
नशों नाश रो गहणो

निषेध दिवस 31 मई से
दूर करो नशा सब घर से।

के०के० रैगर (शिशु अध्यापक)
Mob.7891548099
लिवाली

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