सुफल बनालो जन्म कृष्णनाम गायके – बाबूराम सिंह

कविता

सुफल बनालो जन्म कृष्णनाम गायके
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कृष्ण सुखधाम नाम परम पुनीत पावन ,
पतित उध्दार में भी प्यार दिखलाय के।
कर की मुरलिया से मोहे त्रिलोक जब ,
सुफल बना लो जन्म कृष्ण नाम गाय के।

चौदह भुवन ब्रह्मांण्ड त्रिलोक सारा ,
पालन संहार सृष्टि छन में रचाय के ।
कलिमल त्रास से उदास आज जन-जन ,
वेंणु स्वर फूंक फिर भारत में आय के ।

ललाटे तिलक भाल गीता में सुन्दर माल ,
अधरन पर प्रेम सर मुरली सहाय के ।
आँख रतनारे केश घुंघर के लट सोहे ,
मोहे देव किन्नर नाग छवि छांव पाय के ।

खलहारी कारीकृष्ण खेल यशोदाके गोद ,
ब्रज को बचायो नख पर्वत उठाय के ।
सखियन के रोम-रोम बसत बिहारी ब्रज ,
सार रस सुधा अतुलित वर्षाय के।

बन्धन छुडा़इ बसुदेव देवकी के जेल ,
कुब्जा को काया दीन्ही बांसुरी बजाय के ।
गीता उपदेश भेष सारथी बनाइ आपन ,
अर्जुनको दीन्हो हरि शिष्य सदपाय के ।

पांव में पैजनी पीताम्बरी बदन हरि ,
चारों फल राखे करतल में छुपाय के ।
शेष महेश सुरेश और सरस्वती संत ,
पार नाही पावे कोई रूप गुण गाय के ।

कण-कणमें वासकर हरअघ हर -हर के ,
सारा जग रहे लौ तोही से लगाय के ।
भाव में विभोर प्रेम नेम तार नर्की के ,
होत ना विलम्ब नाथ नंगे पांव धाय के ।

होत ना बखान बलिहारी जाऊँ बार-बार ,
हारे शत कोटि काम रूप से लजाय के ।
बस वही रूप हरि हृदय में बास करे ,
कहे “बाबूराम कवि”शीश पद नाय के ।

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बाबूराम सिंह कवि
बड़का खुटहाँ , विजयीपुर
गोपालगंज (बिहार)851508
मो॰ नं ॰ – 9572105032
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