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भीम बाबा पर कविता

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तांटक छंद – भीम बाबा पर कविता

दुख दर्दो को झेल जनम भर,
निर्धनता के मारे थे।
बाबा अपने निज कर्मो से,
इस जग में उजियारे थे।
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छुवाछुत को मानवता से,
जिसनें पूर्ण मिटाया था।
दीन दुखी का बना मसीहा,
देवरूप में आया था।
जिसने माना एक बराबर,
जग में कासी काबा थे।
परम् ज्ञान के पुंज शिखर जो,
भीमराव निज बाबा थे।
जीत लिया जिसने जीवन को,
नहीं कभी जो हारे थे।
बाबा अपने निज कर्मो से,
इस जग में उजियारे थे।
★★★★★★★★★★
नाम पिता का मिला रामजी,
माता भीमा बाई थी।
और रमा बाई संगत में,
परिणय बँध निभाई थी।
बचपन में जन जन से बाबा,
सदा सताए जाते थे।
फिर भी दुखियों के सेवा में,
अपना जनम बिताते थे।
सत्य धर्म मानवता जिसने,
नित तन मन में धारे थे।
बाबा अपने निज कर्मो से,
इस जग में उजियारे थे।
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CLICK & SUPPORT

रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे “कोहिनूर”
पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.)
मो. 8120587822
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