Join Our Community

Publish Your Poems

CLICK & SUPPORT

कवयित्री वर्षा जैन “प्रखर” आस का दीपक जलाये रखने की शिक्षा

120

आस का दीपक जलाये रखने की शिक्षा

दीपावली की पावन बेला
महकी जूही, खिल गई बेला
धनवंतरि की रहे छाया
निरोगी रहे हमारी काया
रूप चतुर्दशी में निखरे ऐसे
तन हो सुंदर मन भी सुधरे

महालक्ष्मी की कृपा परस्पर
हम सब पर हरदम ही बरसे
माँ लक्ष्मी के वरद हस्त ने
इतना सक्षम हमें किया है
दिल में सबके प्यार जगाएं
अपनी खुशियाँ चलो बाँट आयें

CLICK & SUPPORT

चहुँ ओर है आज दीवाली
दीपोत्सव की सजी है थाली
किसी के आँगन में है खुशियाँ 
किसी का आँगन हो गया खाली
आओ मिलकर हाथ बढ़ाएं
सबका आँगन भी चमकाएं

नौनिहालों को बाँटे खुशियाँ
उनके घर भी मने दीवाली
दिये तले क्यूँ रहे अंधेरा
उसको क्यों तम ने है घेरा
आस का एक दीपक जलाएँ
अपनी खुशियाँ चलो बाँट आयें


वर्षा जैन “प्रखर”
दुर्ग (छत्तीसगढ़)
कविता बहार से जुड़ने के लिये धन्यवाद

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.