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होली पर कविता

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होली पर कविता

चैत्र कृष्ण एकम होली धुलेंड़ी वसंतोत्सव Chaitra Krishna Ekam Holi Dhulendi Vasantotsav

होली की छाई है गजब की खुमारी
लाल लाल दिखे सब नर नारी.

देवरजी ने हरा रंग डाला
ननदजी ने पीला रंग डाला
जीजाजी ने गुलाबी रंग डाला
सिंदूरी रंग पे हाय ये दिल हारा
होहह पियाजी का रंग सब पे है भारी
होली की छाई है गजब खुमारी
लाल लाल…..

पीकर भांग नागिन सी हुई चाल
रंग बिरंगे रंगरसिया लगे सबके गाल
विदेशिया लगे स्टाइल इन्द्रधनुषी बाल
बुढ़े लगाते ठुमके ताल में दे ताल
होहह रंग उड़े फूल बरसे फूलवारी
होली की छाई है ….
लाल लाल….

गर्म गर्म बड़ा पकोड़े टमाटर की चटनी
गिलास गिलास ठंढ़ाई पापड़ी की चखनी
मीठी मीठी गुझिंया ,चीनी की चाशनी
खट्टी मिट्ठी नमकीन लगती हो सजनी
होहह इस बार की होली है बड़ी करारी
होली की छाई है…
लाल…..

✍ सुकमोती चौहान रुचि
बिछिया,महासमुन्द,छ.ग.
@कॉपीराइट
कविता बहार से जुड़ने के लिये धन्यवाद

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