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लेकर आया नूतन वर्ष

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लेकर आया नूतन वर्ष

नव आशाओं की किरणें,
लेकर आया नूतन वर्ष।
       अब धरा में फैले हरियाली,
       शीश में हो खुशहाल कलश।
हिंसा बैर भाव अज्ञानता,
मिटे जग से यह कटुता।
        ज्ञान के चक्षु खुल जायें,
        मानव मानवता दिखलायें।
बिते वर्ष दशक युगान्तर,
मिटा न पाये कालान्तर।
        व्याप्त जग में है भयंकर,
        राजा रंक का ही अंतर।
एक बगिया के हैं फूल,
रंग भिन्न एक हैं धूल।
        एक है सबका बनवारी,
        सिंचे मानवता की क्यारी।
राग द्वेष की बहे न धारा,
हिंसा मुक्त हो जगत हमारा।
         सद्गगुणों को हम अपनाकर,
         झलक एकता की दिखलाकर।
नमन करें सदा भारत माता को,
चहुँ दिशा में खुशहाली फैलाकर ।
           सोच नई व नई उमंग से,
           भर दें ज्ञान का अब तरकश।
नव आशाओं की किरणें,
लेकर आया नूतन वर्ष।।
         

      …….भुवन बिष्ट
            रानीखेत (उत्तराखंड )

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