KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

माँ आखिर माँ होती है

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गीत – माँ आखिर माँ होती है.



पालने में रोये लाल मात का,
माँ लोरी उसे सुनाती है.
गिरने पर माँ सम्भाल लेती,
माँ उंगली पकड़ चलाती है.
माँ ही प्रथम गुरु है,
माँ ही भाषा सिखलाती है.
नेक राह पर चलो सदा,
ये माँ ही हमें बताती है.
चोट लगे बच्चे को गर,
उस दर्द से माँ रोती है.
माँ आखिर माँ होती है,
माँ आखिर माँ होती है.


माँ ने बच्चों की खातिर,
मेहनत और मजदूरी की.
स्वयं सहे संकट हजार,
बच्चों की ख्वाहिश पूरी की.
खुशियाँ भर दीं झोली में,
बच्चों से गमों की दूरी की.
मेरा बच्चा है स्वस्थ आज,
इतने से ही माँ ने सबूरी की.
बच्चों को खाना देकर,
जो स्वयं भूखी सोती है.
माँ आखिर माँ होती है,
माँ आखिर माँ होती है.


निज माँ को कभी दुख न देना,
ओ! माताओं के दुलारे लाल.
करो सदा माँ की सेवा,
समझा रहा है आज कवि विशाल.
माँ बिन हर घर लागे सूना,
माँ से घर में है खुशहाली.
माँ घर में हो तो घर में,
हर रोज है ईद दीवाली.
माँ की एक उम्मीदें बेटों से,
न जाने पूरी क्यों नहीं होती है?
माँ आखिर माँ होती है,
माँ आखिर माँ होती है.

नाम- विशाल श्रीवास्तव.
पिता का नाम- श्री ताराचंद्र
मो.8081130764
पता- जलालपुर, फर्रुखाबाद

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