KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

हिंदी संग्रह कविता- माँ! बस यह वरदान चाहिए

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माँ! बस यह वरदान चाहिए


माँ बस यह वरदान चाहिए।
जीवन-पथ जो कंटकमय हो, विपदाओं का घोर विलय हो।
किन्तु कामना एक यही बस, प्रतिपल पग गतिमान चाहिए। माँ …


हास मिले या त्रास मिले, विश्वास मिले या फास मिले।
गरजे क्यों न काल सम्मुख, जीवन का अभिमान चाहिए॥ माँ…


जीवन के इन संघर्षों में, दुःख – कष्ट के दावानल में,
तिल-तिलकर तन जले न क्यों पर होठों पर मुस्कान चाहिए॥ माँ.


कंटक पथ पर गिरना, चढ़ना, स्वाभाविक है हार जीतना।
उठ-उठ कर हम गिरें, उठे फिर, पर गुरुता का ज्ञान चाहिए। माँ.


मेरी हार देश की जय हो, स्वार्थ- भाव का क्षण-क्षण क्षय हो,
जल-जल कर जीवन , जग को, बस इतना सम्मान चाहिए। माँ…

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