KAVITA BAHAR
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माँ है तो जहान है- अकिल खान

माँ है तो जहान है -अकिल खान

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माँ है तो जहान है -अकिल खान

माँ के बीना ये जिंदगी अधूरा है,
माँ तुम हो तो ये सफर पुरा है।
माँ की ममता से बढ़कर इस दुनिया में कुछ भी नहीं,
माँ की डांट को सह लेना

माँ की इस दुआ से बढ़कर कुछ भी नहीं।।
माँ हमारी जन्नत है माँ का हमपर अहसान है,
माँ है तो जहान है माँ है तो हमारी पहचान है।।

याद है वो बचपन की यादें सोए थे

तुम सुखे में और माँ सोइ गीली पिशाब में,
बड़े दुःख से पाला रे तुझको

फिर भी शामिल करता तू अपनी माँ को

लड़ाई झंझट के हिसाब में।
आज तू दुनिया के चकाचौंध में फंस गया,
किसी और के खातिर आज जहन्नम में तू धंस गया।
सोंच जरा माँ है तो ये सफर कितना आसान है,
माँ है तो जहान है माँ है तो हमारी पहचान है।।

बुढ़ापे में छोड़ न देना कभी

माँ को अपने दहलीज के गेट में,
माँ की हर ख्वाहिश को करना पुरा

क्योंकि माँ ने रखा है नौ महीने हमको पेट में।
मेरे रब के बारगाह में माँ की दुआ टाली नहीं जाती,
हर सपना तेरा होगा पुरा मांगले माँ से

क्योंकि माँ की दुआ कभी खाली नहीं जाती।
बाकी सब दिखावा है असल में माँ हमारी जान है,
माँ है तो जहान है माँ है तो हमारी पहचान है।।

माँ है तो संसार है माँ है तो बहार है,
माँ है तो ख्वाहिश है माँ है तो खुशियाँ हजार है।
माँ हमसे कभी न जाना तुम दूर,
हम हैं तुम्हारे बच्चे हम हो जाएंगे मजबूर।
मेरे रब गुनाहों को हमारी दिल से साफ करदे,
अगर दुःखाया है दिल अपने माँ का

हमने तो हमें भी माफ कर दे।
तू ही संघर्षों का गाथा है तू ही आन बान और शान है,
माँ है तो जहान है माँ है तो हमारी पहचान है।।



_____________अकिल खान, रायगढ़ जिला रायगढ़ (छ. ग.)। पिन–496440.

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