KAVITA BAHAR
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माँ की ममता- सुश्री गीता उपाध्याय

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माँ की ममता
विधा:- गज़ल

मैं हूँ कदमों में उठा ले मुझको।
माँ तू सीने से लगा ले मुझको।।

कब से रोये ही जा रही हूँ मैं।
तू आ के चुप तो करा ले मुझको।।

तेरे दिल का ही एक टुकड़ा हूँ।
अपनी धड़कन में मिला लें मुझको।।

ये तेरी गोद मेरी जन्नत है।
मेरी जन्नत में बिठा ले मुझको।।

इक शिवा तेरे सबसे डरती हूँ।
अपने आँचल में छुपा ले मुझको।।

तेरी ममता के लिए रूठी हूँ।
माँ की ममता से मना ले मुझको।।

‘गीता’ लोरी को तरसती निंदिया।
तू लोरी गा के सुला ले मुझको।।


— सुश्री गीता उपाध्याय
रायगढ़ (छत्तीसगढ़)

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