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मां तू संपूर्णता का सार है -प्रांशु गुप्ता

(एक बच्चे के एहसासों से लिखा मां का जीवन काल)मां तू संपूर्णता का सार है!-प्रांशु गुप्ता

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मां तू संपूर्णता का सार है हिन्दी कविता

मां तू संपूर्णता का सार है!
बिन मांगे तूने मुझको दिया जीवन का उपहार है।
अंश मात्र को रूप देह दे कर तू ने बनाया यह सारा संसार है।

9 महीने कोख में रखकर,
बिन देखे मुझ पर लुटाया अपना सारा प्यार है।
मां तू संपूर्णता का सार है!

मां का बचपन:-

खाना सिखाया, चलना सिखाया, सिखाया तूने सारा संस्कार है।
आंख बंद करके दौड़ पड़ी तेरी और मुझे तुझ पर पूरा विश्वास है।
मेरा तुझ को परेशान करना कौतूहल से भरा हर एक काम करना,
तू कहती यही तो तेरा ईनाम है ।
मां तू संपूर्णता का सार है!

मां की युवावस्था:-

तेरा प्रेम शून्य से लेकर अनंत तक का विस्तार है।
अब बदला मेरे जीवन का धार है,
तेरा फिक्र करना अब लगता मुझे बेकार है ।
अपनी बातों से मैंने पहुंचाया तुझे दुख हजार है ।
फिर भी तेरा वह निश्चल प्रेम मानो सागर का अथाह जल धार है।
मां तू संपूर्णता का सार है!

मां की वृद्धावस्था:-

अब तुझ में भी जागा एक नन्हा शैतान है ।
नंगे पांव भागा करती थी तू मुझे खिलाने को ,
अब करना मुझे भी यही काम है ।
भुला नहीं मैं तेरे संस्कार तू ही मेरे जीवन का आधार है।
आज भी कभी मुझे चोट लगे तो दर्द तुझे भी होता है ।
इतने बरसों में ना तू बदली ना तेरे यह प्यार का एहसास है।
मां तू संपूर्णता का सार है!

मां:-बच्चे के साथ पैदा होती हर बार एक मां है ।
कि मेरे साथ साथ बदला तेरा भी ये जीवन काल है।
तुझसे अलग कहां हूं मैं मां,
मुझे भी तुझसे तेरे जितना ही प्यार है।
मां तू संपूर्णता का सार है!

प्रांशु गुप्ता

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