KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

मातृत्व की अभिव्यक्ति- रीना गोटे

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मातृत्व की अभिव्यक्ति- रीना गोटे



छोटे-छोटे हाथ
नन्हें-मुन्हें पैर
प्यारी-प्यारी आंखें
धक् धक् धक्
धड़कन की आवाजें
महसूस होती रही।


गर्भ में मेरे
जुड़े रहे दोनों
एक प्रणय बीज से
सींचा था जिसे
अपनी साँसों से
कल्पना करते हुए।


उसकी मासूमियत की
आभास न हुई
कोई पीडा़ कभी
अब गोद में आया
प्रणय बीज जीवंत
नयनों से देखकर
उसकी जीवन गति
कोई सीमा नहीं।


मातृत्व सुख की
आज हो गया
मेरा पूर्ण श्रृंगार
प्रदत्त हुआ जो
कुदरत का उपहार।



नाम-रीना गोटे
पता-भिलाई-दुर्ग(छ.ग.)

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