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माघ शुक्ल सप्तमी

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माघ शुक्ल सप्तमी

माघ शुक्ल की सप्तमी,
रवि का आविर्भाव।
लिखा भविष्य पुराण में,
अविचल अंड प्रभाव ।।
अधिक दिनों तक थे स्वयं,
सूर्य देव भी अंड ।
इसीलिए है नाम भी,
उनका श्री मार्तण्ड।।
यह तिथि है अति पुण्य की ,
अचला, भानु, अर्क।
सुत दायक भी कह रहे,
करके तर्क-वितर्क।।
नारद नाम पुराण में,
कही गई यह बात।
यही त्रिलोचन की तिथि,
है जग मे विख्यात।।
इसमे स्नान-दान का,
श्राद्ध सहित कुछ कर्म।
पुण्य प्रदायक हैं सदा,
कहें सनातन धर्म।।
अग्नि पुराण विचार कर,
देते यह संदेश।
निष्ठा से आराधना,
स्वीकृत करें दिनेश।।
द्वादश दल के कमल से,
सूर्य देव का याग।
सात्विक श्रद्धा सहित हो,
दुर्गुण का कर त्याग ।।
तर्पण, पूजा, आरती,
शुद्ध करें मन-प्राण।
सभी प्राणियों का करें,

सूर्य देव कल्याण।।

एन्०पी०विश्वकर्मा, रायपुर