महागौरी

महागौरी(कुंडलियाँ)

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महागौरी शुभंकरा , देवी अष्टम रूप।
सौम्य कांत स्वरूप है , माँ कीशक्तिअनूप।।
माँ की शक्ति अनूप , हे मात विघ्नहारिणी।
चतुर्भुज शान्त रूप , माँ श्वेतवस्त्रधारिणी।।
कहता कवि करजोरि,दीर्घ होजीवन डोरी।
रहे शांति सद्भाव , हे अम्बा महागौरी।।
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माता गौरी हे शिवा ,करे सदा उपकार।
माँ ऋद्धिसिद्धिदायिनी , करो कष्ट से पार।।
करो कष्ट से पार , माँ हर रूप में साजे।
एक हाथ त्रिशूल , दूसरे डमरू बाजे।।
कहत नवल करजोरि,अम्ब हैभाग्यविधाता।
रखती सबका ध्यान , शिवा हे गौरी माता।।

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© डॉ एन के सेठी

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