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महाशिव भोले भंडारी पर गीत

श्रावण मास में आराध्य महाशिव विषधारी, भोले भंडारी की स्तुति तांटक छन्दगीत में….

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महाशिव भोले भंडारी पर गीत

शिव स्तुति
शिव स्तुति, भजन , अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

भोर वंदन-महाशिव तांटक छन्दगीत
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*महाकाल भोले भंडारी, बहुनामी त्रिपुरारी है।…*
*निराकार कण-कण के स्वामी, ज्योति लिंग अवतारी है।…*

सूर्या समाधि धारण करते, अष्टंगी के लाला है।
चक्र कमण्डल गले नाग अरु, अंग वसन मृगछाला है।।
पेशानी चंदन त्रिपुंड है, शेषनाग गर माला है।
अखिल लोक रक्षार्थ निहित है, नीलकंठ में हाला है।।

*भाव समागम दृश्य विहंगम, अर्ध अंग में नारी है।…*
*निराकार कण-कण के स्वामी, ज्योति लिंग अवतारी है।…*

चंद्र भाल डमरू त्रिशूल ले, जीव चराचर काशी में।
धर्म ध्यान विज्ञात समाहित, तीन लोक अविनाशी में।।
गोमुख प्रभु का नित्य बसेरा, तारण करती काया है।
केश जटाएँ गंगा धारे, शंभुनाथ की माया है।।

*भव सागर से पार लगाते, शाश्वत तारणहारी है।…*
*निराकार कण-कण के स्वामी, ज्योति लिंग अवतारी है।…*

शक्ति स्वरूपा मातु भवानी, शिवा मिलन की बेला है।
आदि शक्ति सह शिवशंकर के, भक्त जनों की रेला है।।
दूध शहद जल बेल धतूरा, अक्षत पुष्प चढ़ाते है।
शंखनाद जयघोष सुनाते, गीत मांगलिक गाते हैं।

*सोलह सावन व्रत का पालन, महारात्रि शुभकारी है।…*
*निराकार कण-कण के स्वामी, ज्योति लिंग अवतारी है।…*

==डॉ ओमकार साहू *मृदुल*26/07/21==

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