KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

मै बिन पंखों के – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

इस रचना के माध्यम से कवि बिन पंखों के ही उड़ने की कल्पना को साकार करना चाहता है |
मै बिन पंखों के – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

0 85

मै बिन पंखों के – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

मै बिन पंखों के
उड़ना चाहता हूँ
नै आसमां से
दुनिया देखना चाहता हूँ
सुना है आसमां से
दुनिया सुन्दर दिखती है
खुली आँखों से
ये नज़ारे लेना चाहता हूँ
मै बिन पंखों के
उड़ना चाहता हूँ
आसमां में तारे हैं
बहुत से
मै पास जाकर
इनको छूना चाहता हूँ
सुना है चाँद भी
दिखता है निराला
मै चाँद पर जाकर
उसे निहारना चाहता हूँ
मै बिन पंखों के
उड़ना चाहता हूँ
फूलों की खुशबू ने
किया है मुझको कायल
मै भंवरा बन फूलों का
रस लेना चाहता हूँ
किस्से कहानियों से
मेरा नाता पुराना
मै परी की
कहानी सुनना चाहता हूँ
मै बिन पंखों के
उड़ना चाहता हूँ
मै कोयल बन
मधुर गीत गाना चाहता हूँ
मै कवि बन जीवन में
रौशनी लाना चाहता हूँ
मै शिक्षक बन
ज्ञान विस्तार करना चाहता हूँ
मै बिन पंखों के
उड़ना चाहता हूँ
समर्पण की भावना ने
किया मुझको प्रभावित
मै पृथ्वी की तरह
महान बनना चाहता हूँ
देश भक्ति का जज्बा भी
मुझमे कम नहीं है
मै भगत,सुखदेव
और बिस्मिल बनना चाहता हूँ
मै बिन पंखों के
उड़ना चाहता हूँ
दिखने में छोटा साथ बाती
पर अँधेरे पर है बस उसका
मै अपनी जिंदगी को
दीपों की माला में पिरोना चाहता हूँ
मै दीप बन सबकी जिंदगी को
रोशन करना चाहता हूँ
मै बिन पंखों के
उड़ना चाहता हूँ
मै आसमां से
दुनिया देखना चाहता हूँ

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.