KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

Ghazal: पत्थर – चन्द्रभान ‘चंदन’

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मैं दरिया के बीच कहीं डूबा पत्थर ,
तू गहनों में जड़ा हुआ महँगा पत्थर।।

तुझ को देख के नदी का पानी ठहर गया,
तुझ को छू कर हरकत में आया पत्थर।।

तेरा नाम लिखा जैसे ही तैर गया,
जब जब मैंने पानी में फेंका पत्थर।।

सब चीज़ों का बँटवारा जब ख़त्म हुआ,
मेरे हिस्से में आया सारा पत्थर।।

मैंने ख़ुदा बना देने का लोभ दिया
तब जाकर तो मुश्किल से टूटा पत्थर।।

चन्द्रभान ‘चंदन’

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