KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

Register/पंजीयन करें

Login/लॉग इन करें

User Profile/प्रोफाइल देखें

Join Competition/प्रतियोगिता में हिस्सा लें

Publish Your Poems/रचना प्रकाशित करें

User Profile

मैं गुलाब हूँ

0 1,881

मैं गुलाब हूँ

मैं गुलाब हूं
खूबसूरती में बेमिसाल हूं
थोड़ा नाजुक और कमजोर हूं
छूते ही बिखर जाती हूं
फैल जाती है मेरी पंखुड़ियां
ऐसा लगता है पलाश हूं
उन पंखुड़ियों को मैं समेटती हूं
कांटों की चुभन की परवाह
नहीं करती हूं
बढ़ती जाती हूं
जीवन में आगे
टकराने को नदियों की धारा से
चट्टानों से या तूफानों से
रास्ता खोज जीवन का
एक नया सवेरा पाने को
अपने अस्तित्व को बचाने को
यह सबब भी तो मैंने
गुलाब से ही सीखा है
सुंदरता और सुगंध से लबरेज
गुलाब तोड़ने वालों के
हाथ में कांटा भी चुभाती है ।

कवयित्री- चारूमित्रा
नंबर -9471243970
एम.आई.जी- 82, एच.एच.कॉलोनी, रांची-834002

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.