हिंदी कविता : मैं कौन हूं?(श्रीमती पदमा साहू)

हिंदी कविता : मैं कौन हूं?

मैं कौन हूं, कहाँ से आयी?
किस कारण जन्म हुआ मेरा विचारती हूं।
ईश्वर के हाथों बंधी कठपुतली मैं,
सृजनकार की अमूल्य कृति हूं।
जिसने मुझे जन्म दिया जग में,
उसे बारंबार प्रणाम करती हूं।
गर्भवास में कौल किया प्रभु से,
नित स्मरण उसे मैं करती हूं।

रेलमरेला इस संसार में,
अपनी पहचान ढूंढती हूं।
मेरी सांसों की डोरी प्रभु के हाथों,
प्रभु खेवनहार मैं भवसागर की कस्ती हूं।
क्या है मेरे जीवन का लक्ष्य,
पाने उसे सतत संघर्ष करती हूं।
जाने कब सांसों की डोरी टूट जाए,
सत्कर्म करने नित पग धरती हूं।

स्वार्थ भरे इस माया जग में,
स्वयं में मैं कौन तलाशती हूं।
पंचतत्व की बनी यह कोठरिया,
भ्रमवश इसे मैं संवारती हूं।
पूरे ना होते अरमान कभी ,
नीरस मन को मैं समझाती हूं।
परमार्थ कुछ काज करने ,
खुद को खुदा में तलाशती हूं।

मिला मुझे मेरा उद्देश्य ,
मैं नश्वर काया को धिक्कारती हूं।
प्रभु कठिन राह में देना साथ मेरा,
दुख में भी सुख तलाशती हूं।
जिसे अपना माना वह भ्रम मेरा,
नश्वर जग में प्रभु तुम्हें तलाशती हूं।
ईश्वर के हाथों बनी कठपुतली मैं,
धरा रंगमंच पर प्रभु हाथों नाचती हूं।

श्रीमती पदमा साहू खैरागढ़
जिला राजनांदगांव छत्तीसगढ़

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