KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

कविता बहार बाल मंच ज्वाइन करें @ WhatsApp

@ Telegram @ WhatsApp @ Facebook @ Twitter @ Youtube

मैं तुझमें हूँ तू मुझमें है- मनीभाई नवरत्न

0 5

मैं तुझमें हूँ तू मुझमें है- मनीभाई नवरत्न

मैं तुझमें हूँ, तू मुझमें है.
तू हर किसी का , तू सबमें हैं.
मेरी सांसें चल रही है
क्योंकि तू ही हर कहीं है.

अब चोट दुखती नहीं, जब दर्द तू ही दे रहा है.
तुमसे मिला सब यहाँ पे, फिर क्यों क्या गिला है.
क्यों पुकारूँ तुम्हें मैं, जब देखूँ तू हर कहीं है.

ना खोने का डर है, अब ना पाने की खुशी है.
जो भी लगता मेरा है, सब झूठ है, बेहोशी है.
क्यों ढूँढूं तुम्हें मैं, जब तू छिपा हर कहीं हैं.

मनीभाई नवरत्न

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.