2nd Sunday of may Mother's Day

मां तू संपूर्णता का सार है -प्रांशु गुप्ता

मातृपितृ पूजा दिवस भारत देश त्योहारों का देश है भारत में गणेश उत्सव, होली, दिवाली, दशहरा, जन्माष्टमी, नवदुर्गा त्योहार मनाये जाते हैं। कुछ वर्षों पूर्व मातृ पितृ पूजा दिवस प्रकाश में आया। आज यह 14 फरवरी को देश विदेश में मनाया जाता है। छत्तीसगढ़ में रमन सरकार द्वारा प्रदेश भर में आधिकारिक रूप से मनाया जाता है

मातृ दिवस मई (दूसरा रविवार) MOTHER'S DAY 2ND SUNDAY OF MAY MONTH
मातृ दिवस मई (दूसरा रविवार) MOTHER’S DAY 2ND SUNDAY OF MAY MONTH

मां तू संपूर्णता का सार है हिन्दी कविता

मां तू संपूर्णता का सार है!
बिन मांगे तूने मुझको दिया जीवन का उपहार है।
अंश मात्र को रूप देह दे कर तू ने बनाया यह सारा संसार है।

9 महीने कोख में रखकर,
बिन देखे मुझ पर लुटाया अपना सारा प्यार है।
मां तू संपूर्णता का सार है!

मां का बचपन:-


खाना सिखाया, चलना सिखाया, सिखाया तूने सारा संस्कार है।
आंख बंद करके दौड़ पड़ी तेरी और मुझे तुझ पर पूरा विश्वास है।
मेरा तुझ को परेशान करना कौतूहल से भरा हर एक काम करना,
तू कहती यही तो तेरा ईनाम है ।
मां तू संपूर्णता का सार है!

मां की युवावस्था:-


तेरा प्रेम शून्य से लेकर अनंत तक का विस्तार है।
अब बदला मेरे जीवन का धार है,
तेरा फिक्र करना अब लगता मुझे बेकार है ।
अपनी बातों से मैंने पहुंचाया तुझे दुख हजार है ।
फिर भी तेरा वह निश्चल प्रेम मानो सागर का अथाह जल धार है।
मां तू संपूर्णता का सार है!

मां की वृद्धावस्था:-


अब तुझ में भी जागा एक नन्हा शैतान है ।
नंगे पांव भागा करती थी तू मुझे खिलाने को ,
अब करना मुझे भी यही काम है ।
भुला नहीं मैं तेरे संस्कार तू ही मेरे जीवन का आधार है।
आज भी कभी मुझे चोट लगे तो दर्द तुझे भी होता है ।
इतने बरसों में ना तू बदली ना तेरे यह प्यार का एहसास है।
मां तू संपूर्णता का सार है!

मां:-बच्चे के साथ पैदा होती हर बार एक मां है ।
कि मेरे साथ साथ बदला तेरा भी ये जीवन काल है।
तुझसे अलग कहां हूं मैं मां,
मुझे भी तुझसे तेरे जितना ही प्यार है।
मां तू संपूर्णता का सार है!

प्रांशु गुप्ता

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