मनीभाई के हाइकु


मानवाधिकार
जब जग ने जाना
राष्ट्र संयुक्त।


वैश्विक ताप
संकट में है राष्ट्र
सुधरो आप।


विश्व की शांति
पृथ्वी की सुरक्षा
आतंक मिटा।


अस्त्र की होड़
विकास या विनाश
अंधे की दौड़।


भारत आया
रंग भेद खिलाफ
संसार जागा।


चुनौती देता
पर्यावरण रक्षा
हे राष्ट्र!जुड़ो।

7

“मैं” और “तुम”
खींच गई लकीर
चलो “हम” हों।
8

अस्त्र होती है
हिंसा की प्रतिमूर्ति
लेती हैं शांति।
9
अस्त्र करती
हिंसा प्रतिबाधित
देती हैं शांति।
10
धर्म संकट
अंधायुग में ज्योति
युयुत्सु गति।
11
आत्महत्याएं
है असमाजिकता
संभल जाओ।
12
हैं आत्महत्या
समाजिक बंधन
घातक रोग।
13
अनिच्छा जीना
निरूद्देश्य घूमना
ज्यों आत्मघात।
14

गिद्ध विलुप्त~
मानव ने धर ली
उनका रूप।

✍मनीभाई”नवरत्न”

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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़

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