KAVITA BAHAR
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मनीभाई के पिरामिड रचना

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मनीभाई के पिरामिड रचना

★कलम,कागज,कलमकार

मैं
एक
अबूझ
तुकबंदी
कलमकार
होता ज्यों व्यथित
देता उसे आकार
है मेरे सहचर
कलम कागज
मुखर नहीं
मुझ जैसा
निशब्द
दोनों
ही।

मनीभाई”नवरत्न”

मनीभाई के पिरामिड रचना

★मरणासन्न★

ये
मेरी
कौन सी
है अवस्था
जहाँ से अब
दिखता है सच
होने लगा पवित्र
कैसी भुलभुलैया
अब चला पता
मरणासन्न
हकीकत
जिन्दगी
दिखा
दी।

मनीभाई”नवरत्न”

मनीभाई के पिरामिड रचना

★रिश्ते नातों का जाल★

ये

जग
अजीब
जहाँ पर
होती सबकी
अलग जिन्दगी
तथापि समाहित
रिश्ते नातों का जाल
खट्टी मीठी यादें
आगे बढ़ाती
कहानी को
हरेक
सिरे
में।
मनीभाई” नवरत्न,

मनीभाई के पिरामिड रचना

★क्रांति का सैलाब ★

है

कष्ट
अन्याय
सह जाना
क्यों नहीं लाते
क्रांति का सैलाब
एकता मशाल से
सबके कमाल से
हमारी खामोशी
उन्हें बल दे
हौसला दे
अन्यायी
होने
की।
मनीभाई”नवरत्न”

मनीभाई के पिरामिड रचना

★नैतिकता की पाठ ★

हो

रहे
मां बाप
असहाय
अनैतिकता
बढ़ रही आज
भारी आवश्यकता
नैतिकता की पाठ
सभी को पढ़ना
मांग बढ़ी
प्रबल
आज
की।
मनीभाई”नवरत्न”

मनीभाई के पिरामिड रचना

★न माने हार ★

ये
जान
प्रयास
है नाकाम
न माने हार
हसूँ निराधार
लोग कहे बावला
गम से है हारा
बना असभ्य
सामाजिक
नहीं है
अब
ये।
मनीभाई”नवरत्न”
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