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होबै ब्याहु करौ तइयारी – उपमेंद्र सक्सेना

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होबै ब्याहु करौ तइयारी


चलिऔ संग हमारे तुमुअउ, गौंतर खूब मिलैगी भारी
राम कली के बड़े लला को, होबै ब्याहु करौ तइयारी।

माँगन भात गई मइके बा, लेकिन नाय भतीजी मानी
बोली मौको बहू बनाबौ, नाय करौ कछु आनाकानी
जइसे -तइसे पिंड छुड़ाओ, खूबै भई हुँअन पै ख्वारी
राम कली के बड़े लला को, होबै ब्याहु करौ तइयारी।

पहिना उन कौ भात बाइ के, भइया औ भौजाई आए
टीका करिके बाँटे रुपिया, घरि बारिन कौ कपड़ा लाए
गड़ो- मढ़ौ फिरि लगी थाप, बइयरबानी देउत हैं गारी
राम कली के बड़े लला को, होबै ब्याहु करौ तइयारी।

बाके घरै लगुनिया आए, ढोलक बजी लगुन चढ़बाई
बाने पहिले ऐंठ दिखाई, खूबै रकम हाय बढ़बाई
पइसा मिलै बाय कौ तौ बस, होय बहुरिया केती कारी
राम कली के बड़े लला को, होबै ब्याहु करौ तइयारी।

दाबत होय बँटैगो खूबइ, हियाँ कुल्लड़न मै सन्नाटा
आलू भरिके बनैं कचौड़ी, हलबाइन ने माढ़ो आटा
गंगाफल आओ है एतो,बनै खूब बा की तरकारी
राम कली के बड़े लला को, होबै ब्याहु करौ तइयारी।

नैकै दूर बरात जायगी, खूब बराती नाचैं- गाबैं
घोड़ी पै बइठैगो दूल्हा, जीजा बा के पान खबाबैं
निकरौसी जब होय कुँआ पै,पाँय डारि बइठै महतारी
राम कली के बड़े लला को, होबै ब्याहु करौ तइयारी।

रचनाकार ✍️उपमेंद्र सक्सेना एडवोकेट
‘कुमुद- निवास’, बरेली (उत्तर प्रदेश)

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