KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

मत हद से ज्यादा प्रेम करो

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कविता: मत हद से ज्यादा प्रेम करो।

मत हद से ज्यादा प्रेम करो,
मैं समझाता हूं भैया।
जिन्हें समझ रहे हो तुम अपना,
वो ही तोड़ेंगे तुम्हारा सपना।
जब दिल टुटेगा आपका,
रोओगे बहुत भैया।
मत हद से ज्यादा प्रेम करो,
मैं समझाता हूं भैया।

पहले तो कहेंगी जानू,
तुम बिन और न मेरा।
फिर धीरे धीरे से,
ये धन लूटेंगी तेरा।
फिर नहीं मिलेगा कोई,
तुमको उनसे बचैया।
मत हद से ज्यादा प्रेम करो,
मैं समझाता हूं भैया।

इस जग में गुरु समान,
और देव ना दूजा।
जो हमको ज्ञान देता है,
करो उसीकी पूजा।
गुरु ही है इस जग में,
हमें भव से पार लगैया।
मत हद से ज्यादा प्रेम करो,
मैं समझाता हूं भैया।

जिन माता पिता ने जन्म दिया,
तेरे लिए कईओं से बैर लिया।
मेहनत करके दिन रात थका,
तेरे पिता ने तेरा ख्याल रखा।
एक छोरी के चक्कर में,
उन्हें भूल गया तू भैया।
मत हद से ज्यादा प्रेम करो,
मैं समझाता हूं भैया।

मत बनो यार लैला मजनू,
बनना है बनो अब्दूल कलाम।
जो दे गये अग्नि मिसाइल,
जिन्हें हर कोई करता है सलाम।
जिससे सारी दुनिया चले,
तुम बन जाओ एसी नैया।
मत हद से ज्यादा प्रेम करो,
मैं समझाता हूं भैया।

वीरों ने जान गंवाई थी,
तब हमको मिली आजादी।
इश्क मोहब्बत के चक्कर में,
करो न निज बर्बादी।
बुरे कर्मों में मरोगे तो,
कोई होगा न कंधा दिवैया।
मत हद से ज्यादा प्रेम करो,
मैं समझाता हूं भैया।

कवि विशाल श्रीवास्तव फर्रूखाबादी

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1 Comment
  1. DEEPAK KUMAR SHRIVASTAV says

    Great poem