KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

मेरा चांद ना आया (mera chand na aaya)

hindi choka || हिंदी चोका

मेरा चांद ना आया

 

जगता रहा

मेरा चांद ना आया
छत है सुना
ये दिल घबराया
आंखें तांकती
एक दूजा चांद को
वह कहती
कैसा तेरा चांद वो
वादा मुकरे
सारी रात जगाए
विरह पल
बेकरारी बढ़ाएं
थोड़ी सी कहीं
आहट जो है आती
लबों पर मेरे
मुस्कुराहट छाती
देखूं पलट
एक महज भ्रम
चाहत मेरी
क्या हो गई है कम !
आंखों में फिर
गम का मेघ छाया
तू हकीकत
या है केवल माया।
ये सोच के ही
एक बूंद टपकी
गाल से बाहें
अश्रुधार छलकी
नम करती
मेरे सिरहाने को
एक अकेले
हम गम खाने को
घना अंधेरा
मन है भारी भारी ।
तोड़ ख्वाबों की क्यारी।।

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