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मेरा सपना सबकी खैर

देश की एकता व समभाव प्रस्तुत करती कविता

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मेरा सपना सबकी खैर

सरहद पर न हो दीवारें, मिट जाये हर दिल से बैर,

चलो बुझा दे सब अंगारे, मेरा सपना सबकी खैर |

मेरे सपनों की दुनिया में, प्यार रहे बस प्यार रहे

मिटें द्वेष की सब रेखाएं, प्यार हमारा यही कहे

रह जाये न कोई ग़ैर —2

चलो बुझा दे सब अंगारे, मेरा सपना सबकी खैर |

एक दूजे के दिल में हम, शरबत सा घुल कर देखें

नेह की बारिश में भीगे, हम पर्वत सा धुल कर देखे

धुल जाये मन का सब मैल —2

चलो बुझा दे सब अंगारे, मेरा सपना सबकी खैर |

दिल में प्यार भरें हम इतना, नफ़रत न रह जाये

मानव फिर मानवता को, सच्चे मन से अपनाये

विश्व शांति की उठी लहर —–2

चलो बुझा दे सब अंगारे, मेरा सपना सबकी खैर |

आतंकी गतिविधियों को मिले कहीं न पानी-खाद

बंद हो बारूदों की खेती, रह जाये न कहीं फ़साद

उगल सके न कोई जहर —2

चलो बुझा दे सब अंगारे, मेरा सपना सबकी खैर |

प्रेम नेह समरसता होगी, जब आने वाले कल में

आदरभाव रहे शामिल, जीवन के दुर्लभ पल में

सबका जीवन हो बेहतर —–2

चलो बुझा दे सब अंगारे, मेरा सपना सबकी खैर |

सोने की चिड़िया वाला बाला भारत फिर हमें बनाना है

विश्व पटल पर छा जाये, ऐसा परचम लहराना है

कोशिश से निकलेगा हल —-2

चलो बुझा दे सब अंगारे, मेरा सपना सबकी खैर |

उमा विश्वकर्मा कानपुर, उत्तर प्रदेश

मो. ९५५४६२२७९५

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