KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

मेरे कबीर- कविता(श्रीमती पदमा साहू)

संत कबीर जी के जीवन दर्शन को कविता में दर्शाया गया है।

मेरे कबीर

मेरे कबीर,
काशी लहरतारा ताल बीच अवतरित होने कबीर!

जेठ सुदी बरसाइत जलज माही पौढ़न किए!!
नीरू नीमा को सांसारिक मात-पिता बना!
जुलाहा घर कबीर अपना चरण पग धर दिए!!
एक दिन स्वामी रामानंदजी ब्रह्म मुहूर्त गंगाघाट पधारे!
चरण लगते स्वामी के कबीर रोने लग गए!!
यह देख स्वामी जी रटने लगे राम नाम बार- बार!
शब्द राम सुन स्वामी जी को गुरु अपना बना लिए!!

कबीर तेजस्वी,अंतर्ज्ञान सागर उर में भरे!
कलयुग में सब जग रमने कबीर नाम धराए !!
मात- पिता के घर रहते जीवन निर्वाह कर!
दो चादर रोज बुन कर परमार्थ दान दिए!!
अद्भुत ज्ञान कबीर का समझे कौन इसे?
कमाल कमाली जीवनदान दे अपना शिष्य बना लिए !!
मसि, कागद, लेखनी कबीर नहीं थामें!
स्थितप्रज्ञ ज्ञान कबीर अपने मुख से जना दिए!!

धर्म दर्शन, मत-मतांतर का था गहरा ज्ञान!
अंधविश्वास उखाड़ फेंकने जन-जन ज्ञान फैला दिए !!
सामाजिक कुरुति पाखंडवाद को मिटाने!
भाईचारा कायम रखने जन में ज्ञान ज्योत जला दिए!!
सत्ता में चूर मदमस्त सिकंदर को!
दिव्य ज्ञान प्रकाश दिखा राह में ला दिए!!
साखी, शबद, रमैनी, उलटवासी तुम्हारी !
अटपट ज्ञान से भरे गागर झटपट कोई न समझ पाएं!!

मुड़ जड़बुद्धि चेताने घट-घट चोट मार तुम!
भवबंधन मिटाने अलख ज्ञान जन में भर दिए!!
अपना ज्ञान भंडार बांटने शिष्य की पहचान में!
काशी से बांधवगढ़ धर्मदास आमीन घर आए !!
करोड़ों धनसंपदा ठुकरा अपना भाग्य जगा!
धर्मदास गुरू पहचान तुम्हारे शिष्य हो लिए!!
ज्ञान की गंगा उधेड़ धर्मदास पर कबीर!
जग को परमपद तत्वज्ञान दे दिए!!

मगहर प्राण तजे गधा होई काशी तजे मुक्ति मिले!
यह मतिभ्रम मिटाने काशी से मगहर जा ज्ञान फटकार लगाए!!
क्या काशी, क्या मगहर, क्या उसर जमीन?
ह्रदय में राम तो छूटे प्राण कहीं यह भ्रम दूर कर दिए !!
झूठी काया झूठी माया नश्वर जग छोड़ कबीर!
सुमन में जन्म ले अंत समय सुमन में ही हो लिए !!

श्रीमती पदमा साहू खैरागढ़
जिला राजनांदगांव छत्तीसगढ़

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