माघ कृष्ण पंचमी मकर संक्रांति Magha Krishna Panchami Makar Sankranti

मकर संक्रांति पर कविता

मकर संक्रांति पर कविता

माघ कृष्ण पंचमी मकर संक्रांति Magha Krishna Panchami Makar Sankranti
माघ कृष्ण पंचमी मकर संक्रांति Magha Krishna Panchami Makar Sankranti

मधुर – मृदु बोल संक्रांति पर , तिल – गुड़ – लड्डू के खाओ
मिलजुलकर सभी प्रेम – प्यार , समता , सौहार्द बढ़ाओ
महापर्व संक्रांति लाए सदा , खुशहाली चहुँ ओर ,
पतंग उड़ाओ , शुभकामनाएँ लेते – देते जाओ ।

आया – आया करो स्वागत , पर्व संक्रांति का महान
सपने ऊँचे सजाकर तुम , छू लो विस्तृत आसमान
आशाओं की उड़े पतंग , थामो विश्वासों की डोर ,
पुण्य कमाओ आज सभी , देकर प्रेम से कुछ भी दान ।

कितना बढ़िया पावन , मनमोहक है , खुशी का त्योहार
अफ़सोस ! आता नहीं मनोहर , यह त्योहार बार – बार
ख़ुशबू ही ख़ुशबू फैली जा रही , अब तो चारों ओर ,
गन्ने – रस की खीर , तिल – गुड़ के लड्डू होंगे तैयार ।

अन्य राज्यों के साथ अब तो , पंजाब भी सराबोर
गूँजता जा रहा लोहड़ी के , संगीत का मधुर शोर
सुन्दर मुंदरिए मनोहर गाना , सबको ही है भाता ,
भंगड़े – गिद्दे के साथ , थामते सब पतंग की डोर ।

रवि रश्मि ‘ अनुभूति ‘

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