KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

कविता बहार बाल मंच ज्वाइन करें @ WhatsApp

@ Telegram @ WhatsApp @ Facebook @ Twitter @ Youtube

मनीभाई के हाइकु अर्द्धशतक भाग 2

0 77

हाइकु अर्द्धशतक

५१/ बिखरे पुष्प
बंसत सुगंधित
भ्रमर गीत।

५२/ कबूल
फूल हो चाहे धुल
प्यार है मूल।

५३/ प्यार जीवन
मिट्टी की दुनिया में
बाकी कफन।

५४/ पत्थर दिल
पिघलता प्यार से
नहीं मुश्किल। 

५५/ मुड़ा भास्कर
उत्तरायण गति 
हुई संक्रांति।

५६/ उत्तरायणी
हो चला दिनकर
राशि मकर।  

५७/ किया तर्पण
भगीरथ गंगा से
संक्रांति दिन।

५८/ संक्रांति तिथि
शरीर परित्याग
महान  भीष्म।


५९/ बाल संवारे~
कांधे लटका थैला
स्कूल को चलें।


६०/ वो बेसहारे

करते है जो कर्म

बिना विचारे

६१/ चार दिनों में ~
दो दिन हँसना है

दो दिन रोना

६२/ अति तनाव
विनाश का कारण
विकास बाधा।

६३/ ना मकान है
आसमान बसेरा
क्या खोना मेरा?

६४/ मनाने चला ~

खट्टी मीठी यादो को

भुलाने चला  

६५/ शब्द लकीर~
ये बताने चला है
दिल का पीर।

६६/ हर निवाला
ईश्वर का प्रसाद
आनंद भोग।

६७/ सहनशील
होता महान गुण
देवत्व प्राप्ति।


६८/ मताधिकार
लोकतंत्र की जान
दे पहचान।

६९/ है शर्मनाक
कन्या भ्रूण की हत्या~
विचारणीय।

७०/ हैलो नमस्ते
मधुर सम्बन्ध के
भाव जताते

७१/ ऊर्जा संचय
प्रकृति का संरक्षण
भावी सुरक्षा।

७२/ स्वतंत्र होना
मानव अधिकार
प्राथमिकता।  

७३/ सीखता चल
संकट हर पल
भाग्य बदल


७४/ बेशर्म नेता
राष्ट्र के हिटलर
लुटी अस्मिता

७५/ बिन योग्यता
बन जाते हैं नेता
देश दुर्दशा ।

७६/ जिंदगी मौत
किया जो बेसहारा
कौन हमारा?


७७./ अति अवज्ञा
अति परिचय से
गर हो त्रुटि


७८/ की बांग
कानों में रस घोली
अंखियां खुली।

७९/ शांत तालाब
पाहन की चोट से
बिखर चला।

८०/ मुस्कुरा गई
नव वधु के लब
मैका आते ही।  

८१/ बच्चे मायुस
बिजली आते उठी
खुशी लहर।


८२/ भूले बिसरे
यादों में झिलमिल
असल पूंजी।


८३/ बिछड़ा वर्ष
यादों की झरोखा दे
शुभ विदाई ।

८४/ विदा ले साल
किये कई कमाल
वक्त की चाल

८५/ चीक से देखे
वो पड़ोसन मेरी
हाय ! शर्माये।

८६/ सौ चोट सहे
हिले डुले डबरा
फिर संभलें।

८७/ खोज ली चींटी
छान पत्थर मिट्टी
अजब दीठि।

८८/ पौष पूर्णिमा
कृषक अन्न दाता
विश्व विधाता।  

८९/ माया गठरी
बांध चला मनुवा
ढूंढे ठिकाना।

९०/ दादी कहानी
जो किताबी हो चली
होती रूहानी।

९१/ अभ्यास गुरू
करो मार्ग आसान
बनो सुजान।

९२/ आकाश गंगा
तारों की टिमटिम
तम की आस।

९३/ छटा निखरी
ताल में स्वर्ण थाल
आभा बिखरी

९४/ अंधे की लाठी
निज सपूत कांधा
विश्वास बांधा।

९५/ भीषण शीत
लब गुंजित करे
शास्त्रीय गीत।

९६/ खेल जिन्दगी
जरा जोर लगाके
हारे या जीते।  

९७/ खेल भावना
चरित्र का आधार
जीत या हार।

९८/ बाल संवारे
दीदी आज भाई का
सहज प्रेम


९९/ दिन बदले
कैलेण्डर बदले
तू भी बदल!

१००/ परिवर्तन
जीवन परिभाषा
निकाल हल

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.