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मनीभाई की तांका

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मनीभाई की तांका

नंद के लाला
ब्रज का तू गोपाला
है भोला भाला
भाये बांसुरी तेरी
छाये प्रेम घनेरी।।

-मनीभाई

मनीभाई की तांका - कविता बहार - हिंदी कविता संग्रह


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नाचते देखा
देव विसर्जन में
लोगों को
लिए फूहड़पन
डीजे केे तरानों में।
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मैं नहीं एक
मेरे रूप अनेक
मैं ही ना जानूँ 
मेरी हकीकत को
मुझसे मिला दे तू।
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मनीभाई ‘नवरत्न’

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