KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

मोर संग पढ़व रे ,मोर संग लिखव -मनीभाई नवरत्न

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छत्तीसगढ़ी गीत:-
(मोर संग चलव रे…. आदरणीय श्री लक्ष्मण मस्तुरिहा के गीत से प्रेरित व उसी के तर्ज़ पर)

मोर संग पढ़व रे
मोर संग गढ़व ….
ओ दीदी बहनी नोनी मन
अउ लइका के महतारी मन
मोर संग पढ़व रे
मोर संग गढ़व ।

महिला मन के हक ल छिनै
ए पुरुष समाज।
भोग विलास के चीज जानै
लुट के जेकर लाज।
अपन लड़ई अपन हाथ म
अपन रक्षा करव रे।
मोर संग लड़व ….

बंध के नारी, चारदीवारी
कइसे विकास पाय।
घुट घुट के मर जाही तभोले
पुरूष नी करे हाय।
भीख बरोबर मांगव झन
आपन हक़ छीनव रे।
मोर संग लड़व…..

?मनीभाई नवरत्न

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