मोर संग पढ़व रे ,मोर संग लिखव -मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ी गीत:-
(मोर संग चलव रे…. आदरणीय श्री लक्ष्मण मस्तुरिहा के गीत से प्रेरित व उसी के तर्ज़ पर)

मोर संग पढ़व रे
मोर संग गढ़व ….
ओ दीदी बहनी नोनी मन
अउ लइका के महतारी मन
मोर संग पढ़व रे
मोर संग गढ़व ।

महिला मन के हक ल छिनै
ए पुरुष समाज।
भोग विलास के चीज जानै
लुट के जेकर लाज।
अपन लड़ई अपन हाथ म
अपन रक्षा करव रे।
मोर संग लड़व ….

बंध के नारी, चारदीवारी
कइसे विकास पाय।
घुट घुट के मर जाही तभोले
पुरूष नी करे हाय।
भीख बरोबर मांगव झन
आपन हक़ छीनव रे।
मोर संग लड़व…..

?मनीभाई नवरत्न

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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़