फ़िल्म समीक्षा ‘कलयुग’ : श्याम बेनेगल (1981)

फ़िल्म समीक्षा 'कलयुग' : श्याम बेनेगल (1981) महाभारत की कथा विघटित होते गण समाजों और विकसित होते राजसत्ता के दौर की कहानी है। यह अपने यथार्थवादी दृष्टिकोण के लिए भी…

0 Comments

तीसरी कसम : न कोई इस पार हमार न कोई उस पार

तीसरी कसम : न कोई इस पार हमारा न कोई उस पार रेणु की चर्चित कहानी 'तीसरी कसम उर्फ़ मारे गए गुलफ़ाम' पर आधारित फ़िल्म 'तीसरी कसम'(1966) की काफ़ी चर्चा…

0 Comments

आधे-अधूरे : पूर्णता की तलाश बेमानी है

आधे-अधूरे : पूर्णता की तलाश बेमानी है मोहन राकेश जी का यह नाटक अपने पहले मंचन(1969) से ही चर्चित रहा है.तब से अब तक अलग-अलग निर्देशकों और कलाकारों द्वारा इसका…

0 Comments

फ़िल्म समीक्षा : सत्यकाम- हृषिकेश मुखर्जी (1969)

फ़िल्म समीक्षा : सत्यकाम- हृषिकेश मुखर्जी (1969) आजादी के संघर्ष के दौरान यह सपना देखना स्वभाविक था कि स्वतंत्रता के बाद देश का अपने ढंग,अपनी आकांक्षाओं के अनुरूप पुनर्निर्माण किया…

0 Comments