KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

कविता बहार बाल मंच ज्वाइन करें @ WhatsApp

@ Telegram @ WhatsApp @ Facebook @ Twitter @ Youtube

मुड़ धर रोये किसान

0 762

मुड़ धर रोवए किसान
    ————————

  देख तोर किसान के हालत,
      का होगे  भगवान !
  कि मुड़ धर रोवए किसान,
  ये का दिन मिले भगवान !!

  पर के जिनगी बड़ सवारें
अपन नई करे फिकर जी !
  बजर  दुख उठाये तन म,
  लोहा बरोबर जिगर जी !!
  पंगपंगावत बेरा उठ जाथे ,
  तभ होथे सोनहा बिहान !
कि मुड़ धर रोवए किसान !!

अच्छा दिन आही कहिके ,
हमला बड़ भरमाये जी l
गदगद ले बोट पागे,
अब ठेंगवा दिखाये जी l
बिश्वास चुल्हा म बरगे ,
भोंदू बनगे किसान ll
कि मुड़ धर रोये किसान l

अन कुवांरी हम उपजायेन ,
कमा के बनगेन मरहा जी l
पोट ल अउ पोट करदीस ,
हमला निचट हड़हा जी ll
नांगर छोड़ सड़क म उतरगे,
लगावत हे बाजी जान l

दूजराम साहू “अनन्य”
निवास -भरदाकला (खैरागढ़)
जिला – राजनांदगाँव( छ. ग .)

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.